Hindi – Grammar

व्यंजन संधि:

जब किसी व्यंजन के बाद स्वर या व्यंजन आने से जो विकार (परिवर्तन) होता है, उसे व्यंजन संधि कहते हैं।
[1] वर्ग के पहले वर्ण (क, च, ट, त, प) का तीसरे वर्ण में परिवर्तन:
  1. दिक् + गज = दिग्गज
  2. वाक् + ईश = वागीश
  3. अच + अंत = अजंत
  4. षट् + आनन = षडानन
  5. अप् + ज = अब्ज
  6. दिक् + अंबर = दिगंबर
  7. वाक् + जाल = वाग्जाल
  8. भगवत् + गीता = भगवद्गीता
  9. सत् + आचार = सदाचार
  10. उत् + घाटन = उद्घाटन
  11. जगत् + ईश = जगदीश
  12. उत् + योग = उद्योग
  13. सत् + धर्म = सद्धर्म
  14. अप् + द = अब्द
  15. षट् + दर्शन = षड्दर्शन
वर्ग के पहले वर्ण का पांचवें वर्ण में परिवर्तन:
  1. वाक् + मय = वाङ्मय
  2. षट् + मास = षण्मास
  3. उत् + नयन = उन्नयन
  4. जगत् + नाथ = जगन्नाथ
  5. सत् + मार्ग = सन्मार्ग
  6. अप् + मय = अम्मय
  7. तत् + मय = तन्मय
  8. चित् + मय = चिन्मय
  9. जगत् + माता = जगन्माता
  10. वाक् + निपुण = वाङ्निपुण
‘त्’ या ‘द्’ संबंधी महत्वपूर्ण नियम:
  1. उत् + चारण = उच्चारण
  2. सत् + जन = सज्जन
  3. उत् + लास = उल्लास
  4. जगत् + जननी = जगज्जननी
  5. उत् + झटिका = उज्झटिका
  6. उत् + डयन = उड्डयन
  7. बृहत् + टीका = बृहट्टीका
  8. तत् + लीन = तल्लीन
  9. शरत् + चंद्र = शरच्चंद्र
  10. उत् + लेख = उल्लेख
‘त्’ या ‘द्’ के बाद ‘श्’ या ‘ह’ होने पर
  1. सत् + शास्त्र = सच्छास्त्र
  2. उत् + श्वास = उच्छ्वास
  3. श्रीमत् + शरत्चंद्र = श्रीमच्छरत्चंद्र
  4. तत् + शिव = तच्छिव
  5. उत् + हार = उद्धार
  6. पत् + हति = पद्धति
  7. उत् + हृत = उद्धृत
  8. उत् + हत = उद्धत
  9. तत् + हित = तद्धित
  10. वाक् + हरि = वाग्घरि
‘म्’ के बाद कोई स्पर्श व्यंजन आने पर
  1. सम् + कल्प = संकल्प
  2. सम् + चय = संचय
  3. सम् + तोष = संतोष
  4. सम् + पूर्ण = संपूर्ण
  5. सम् + भव = संभव
  6. किम् + नर = किन्नर
  7. सम् + गम = संगम
  8. परम् + तु = परंतु
  9. सम् + देश = संदेश
  10. सम् + मान = सम्मान
‘म्’ के बाद ‘य, र, ल, व, श, ष, स, ह’ आने पर
  1. सम् + योग = संयोग
  2. सम् + रक्षण = संरक्षण
  3. सम् + लाभ = संलग्न
  4. सम् + सार = संसार
  5. सम् + हार = संहार
  6. सम् + वाद = संवाद
  7. सम् + शोधन = संशोधन
  8. सम् + रक्षक = संरक्षक
‘न्’ का ‘ण्’ में परिवर्तन (पूर्व में ऋ, र, ष हो तो)
  1. परि + मान = परिमाण
  2. प्र + मान = प्रमाण
  3. कृष् + न = कृष्ण
  4. भू + ण = भूषण
  5. राम + अयन = रामायण
  6. परि + नाम = परिणाम
  7. विष + नु = विष्णु
  8. शोषण = शोषण (अपवाद)
‘स्’ से पहले अ/आ को छोड़कर अन्य स्वर आने पर (षत्व संधि)
  1. अभि + सेक = अभिषेक
  2. वि + सम = विषम
  3. सु + सुप्त = सुषुप्त
  4. नि + सिद्ध = निषिद्ध
  5. नि + सेध = निषेध
  6. प्रति + स्थान = प्रतिष्ठा
  7. अनु + संग = अनुषंग
  8. सु + समा = सुषमा
  9. वि + साद = विषाद
‘छ’ संबंधी नियम (आधा ‘च्’ जुड़ना)
  1. स्व + छंद = स्वच्छंद
  2. आ + छादन = आच्छादन
  3. वृक्ष + छाया = वृक्षच्छाया
  4. परि + छेद = परिच्छेद
  5. अनु + छेद = अनुच्छेद
  6. वि + छेद = विच्छेद
  7. मातृ + छाया = मातृच्छाया
‘ऋ’, ‘र्’, ‘ष्’ के बाद ‘न्’ का ‘ण्’ होना
  1. परि + नाम = परिणाम
  2. प्र + नाम = प्रणाम
  3. ऋ + न = ऋण
  4. नर + अयन = नरायण
  5. भर + अन = भरण
अन्य सबसे प्रमुख और अपवादजनक उदाहरण
  1. उत् + आन = उद्यान
  2. सत् + गति = सद्गति
  3. सम् + कृत = संस्कृत
  4. परि + कार = परिष्कार
  5. सम् + कार = संस्कार
  6. भा + कर = भास्कर
  7. नमः + कार = नमस्कार (विसर्ग संधि के अंतर्गत शामिल, पर अत्यंत महत्वपूर्ण)
  8. उत् + वास = उच्छ्वास

 

स्वर संधि (Swar Sandhi):

 

के अंतर्गत दो स्वरों के मेल से विकार उत्पन्न होता है। इसके मुख्य 5 भेद होते हैं: दीर्घ, गुण, वृद्धि, यण और अयादि

1. दीर्घ स्वर संधि (जब समान स्वर मिलकर दीर्घ हो जाएं)
  1. धर्म + अर्थ = धर्मार्थ
  2. देव + आलय = देवालय
  3. पुस्तक + आलय = पुस्तकालय
  4. विद्या + अर्थी = विद्यार्थी
  5. महा + आशय = महाशय
  6. परीक्षा + अर्थी = परीक्षार्थी
  7. भोजन + आलय = भोजनालय
  8. विद्या + आलय = विद्यालय
  9. कवि + इंद्र = कविंद्र
  10. मुनि + ईश = मुनीश
  11. गिरी + ईश = गिरीश
  12. हरि + ईश = हरीश
  13. नदी + ईश = नदीश
  14. नदी + ईश्वर = नदीश्वर
  15. महि + इंद्र = मतींद्र
  16. भानु + उदय = भानूदय
  17. लघु + ऊर्मि = लघूर्मि
  18. वधू + उत्सव = वधूत्सव
  19. भू + ऊर्ध्व = भूर्ध्व
  20. पितृ + ऋण = पितृण
2. गुण स्वर संधि (अ/आ के बाद इ/ई, उ/ऊ या ऋ आए तो ए, ओ, अर् बनना)
  1. नर + इंद्र = नरेंद्र
  2. सुर + इंद्र = सुरेंद्र
  3. ज्ञान + उपदेश = ज्ञानोपदेश
  4. महा + इंद्र = महेंद्र
  5. नर + ईश = नरेश
  6. गण + ईश = गणेश
  7. महा + ईश = महेश
  8. रमा + ईश = रमेश
  9. यथा + इष्ट = यथेष्ट
  10. महा + उत्सव = महोत्सव
  11. वीर + उचित = विरोचित
  12. महा + ऊर्मि = महोर्मि
  13. जल + ऊर्मि = जलोर्मि
  14. देव + ऋषि = देवर्षि
  15. महा + ऋषि = महर्षि
  16. ब्रह्म + ऋषि = ब्रह्मर्षि
  17. वसंत + ऋतु = वसंतर्तु
  18. सर्व + उदय = सर्वोदय
  19. सूर्य + उदय = सूर्योदय
  20. पर + उपकार = परोपकार
3. वृद्धि स्वर संधि (अ/आ के बाद ए/ऐ हो तो ऐ, ओ/औ हो तो औ बनना)
  1. एक + एक = एकैक
  2. सदा + एव = सदैव
  3. मत + एक = मतैक
  4. मत + एकता = मतैकता
  5. महा + ऐश्वर्य = महैश्वर्य
  6. लोक + एषणा = लोकैषणा
  7. धन + ऐश्वर्य = धनैश्वर्य
  8. तथा + एव = तथैव
  9. महा + एव = महैव
  10. पुत्र + एषणा = पुत्रैषणा
  11. जल + ओघ = जलौघ
  12. महा + ओज = महौज
  13. परम + औषध = परमौषध
  14. महा + औषध = महौषध
  15. वन + औषधि = वनौषधि
  16. कृष्ण + एकत्व = कृष्णैकत्व
  17. विद्या + अर्थ = विद्यर्थ
  18. सदा + आनंद = सदानंद
  19. गंगा + ओघ = गंगौघ
  20. महा + ऊर्जा = महूर्जा 
4. यण स्वर संधि (इ/ई, उ/ऊ, ऋ के बाद असमान स्वर आने पर य्, व्, र् बनना)
  1. यदि + अपि = यद्यपि
  2. अति + अधिक = अत्यधिक
  3. इति + आदि = इत्यादि
  4. अभि + आगत = अभ्यागत
  5. प्रति + उत्तर = प्रत्युत्तर
  6. सु + आगत = स्वागत
  7. अनु + अय = अन्वय
  8. मधु + अरि = मध्वरि
  9. अनु + एषण = अन्वेषण
  10. पितृ + आज्ञा = पित्रज्ञा
  11. मातृ + आज्ञा = मात्रज्ञा
  12. देवी + आगमन = देव्यागमन
  13. नदी + अर्पण = नद्यर्पण
  14. त्रि + अर्थ = त्र्यर्थ
  15. नी + ऊन = न्यून
  16. वि + आकरण = व्याकरण
  17. परि + आवरण = पर्यावरण
  18. उपरि + उक्त = उपर्युक्त
  19. अधि + आदेश = अध्यादेश
  20. प्रति + अर्पण = प्रत्यर्पण
5. अयादि स्वर संधि (ए, ऐ, ओ, औ का अय्, आय्, अव्, आव् में बदलना)
  1. ने + अन = नयन
  2. चे + अन = चयन
  3. से + अन = शयन
  4. गे + अन = गायन
  5. गै + अक = गायक
  6. नै + अक = नायक
  7. पो + अन = पवन
  8. भो + अन = भवन
  9. भो + उक = भावुक
  10. पो + इत्र = पवित्र
  11. नौ + इक = नाविक
  12. पौ + अक = पावक
  13. भौ + अक = भावक
  14. गो + ईश = गवीश
  15. गो + इंद्र = गवेन्द्र
  16. धौ + अक = धावक
  17. लो + अन = लवन
  18. श्रो + अन = श्रवण
  19. प्रो + अन = प्रवण
  20. गै + इका = गायिका

 

विसर्ग संधि (Visarga Sandhi):

1. ‘ओ’ (O) में परिवर्तन वाले उदाहरण (नियम: विसर्ग से पहले ‘अ’ और बाद में ‘अ’ या कोई सघोष व्यंजन हो)
  1. मनः + अनुकूल = मनोअनुकूल
  2. मनः + योग = मनोयोग
  3. वयः + वृद्ध = वयोवृद्ध
  4. यशः + दा = यशोदा
  5. पयः + द = पयोद
  6. मनः + रथ = मनोरथ
  7. तपः + बल = तपोबल
  8. अधः + गति = अधोगति
  9. पयः + धर = पयोधर
  10. तेजः + मय = तेजोमय
  11. मनः + रंजन = मनोरंजन
  12. पुरः + हित = पुरोहित
  13. सरः + ज = सरोज
  14. वयः + वृद्ध = वयोवृद्ध
  15. मनः + हर = मनोहर
2. ‘र’ (R) में परिवर्तन वाले उदाहरण (नियम: विसर्ग से पहले ‘अ’ या ‘आ’ को छोड़कर कोई स्वर हो)
  1. निः + आश = निराश
  2. निः + धन = निर्धन
  3. निः + बल = निर्बल
  4. आशीः + वाद = आशीर्वाद
  5. निः + गुण = निर्गुण
  6. दुः + जन = दुर्जन
  7. निः + भय = निर्भय
  8. दुः + बोध = दुर्बोध
  9. निः + मल = निर्मल
  10. निः + विकार = निर्विकार
  11. निः + धारण = निर्धारण
  12. बहिः + मुख = बहिर्मुख
  13. अंतः + गंतर्गत = अंतर्गत
  14. दुः + उपयोग = दुरुपयोग
  15. निः + आकार = निराकार
3. ‘श’ में परिवर्तन वाले उदाहरण (नियम: विसर्ग के बाद ‘च’ या ‘छ’ हो)
  1. निः + चल = निश्चल
  2. दुः + चरित्र = दुश्चरित्र
  3. निः + चिंत = निश्चिंत
  4. हरिः + चंद्र = हरिश्चंद्र
  5. निः + चेष्ट = निश्चेष्ट
  6. दुः + चक्र = दुश्चक्र
4. ‘ष’ में परिवर्तन वाले उदाहरण (नियम: विसर्ग के बाद ‘ट’ या ‘ठ’ हो)
  1. धनुः + टंकार = धनुष्टंकार
  2. निः + ठुर = निष्ठुर
  3. चतुः + टीका = चतुष्टीका
5. ‘स’ में परिवर्तन वाले उदाहरण (नियम: विसर्ग के बाद ‘त’ या ‘थ’ हो)
  1. नमः + कार = नमस्कार
  2. पुरः + कार = पुरस्कार
  3. निः + संतान = निस्संतान
  4. निः + तेज = निस्तेज
  5. दुः + साहस = দুঃसाहस
  6. मनः + ताप = मनस्ताप
  7. वाचः + पति = वाचस्पति
  8. नमः + ते = नमस्ते
  9. निः + सार = निस्सार
  10. चतुः + सूत्री = चतुःसूत्री
6. विसर्ग का लोप होना (नियम: विसर्ग के बाद ‘छ’ आने पर बीच में ‘च’ जुड़ जाता है)
  1. अनु + छेद = अनुच्छेद
  2. छत्र + छाया = छत्रच्छाया
  3. आ + छादन = आच्छादन
  4. वृक्ष + छाया = वृक्षच्छाया
7. विसर्ग का लोप होना और पूर्व स्वर का दीर्घ होना (नियम: विसर्ग के बाद ‘र’ होने पर)
  1. निः + रोग = निरोग
  2. निः + रस = नीरस
  3. निः + रव = नीरव 
8. विसर्ग का लोप होना (नियम: विसर्ग के बाद ‘अ’ या ‘आ’ को छोड़कर कोई स्वर हो)
  1. अतः + एव = अतएव
9. विसर्ग में कोई परिवर्तन न होना (नियम: विसर्ग के बाद ‘क’, ‘ख’, ‘प’, ‘फ’ हो)
  1. प्रातः + काल = प्रातःकाल
  2. अंतः + करण = अंतःकरण
  3. मनः + कामना = मनकामना
  4. पयः + पान = पयःपान
  5. निः + काम = निष्काम
  6. निः + फल = निष्फल
  7. निः + कपट = निष्कपट
10. कुछ अन्य सबसे महत्वपूर्ण मिश्रित उदाहरण
  1. दुः + तर = दुस्तर
  2. दुः + साहस = দুঃसाहस
  3. निः + शल्क = निःशुल्क
  4. दुः + ख = दुःख
  5. निः + संदेह = निस्संदेह
  6. निः + स्वार्थ = निस्वार्थ
  7. निः + शेष = निश्शेष
  8. चतुः + कोण = चतुष्कोण
  9. बहिः + कार = बहिष्कार
  10. अंतः + राष्ट्रीय = अंतरराष्ट्रीय
  11. निः + चय = निश्चय
  12. दुः + प्राप्य = दुष्प्राप्य
  13. निः + पक्ष = निष्पक्ष
  14. दुः + शासन = দুঃशासन
  15. निः + प्राण = निष्प्राण
  16. चतुः + पथ = चतुष्पथ
  17. मनः + अनुकूल = मनोनुकूल
  18. दुः + कर्म = दुष्कर्म
  19. निः + क्रिय = निष्क्रिय
  20. निः + शुल्क = निःशुल्क
  21. निः + संकोच = निस्संकोच
  22. निः + तेज = निस्तेज
  23. दुः + साध्य = दुस्साध्य
  24. नमः + कार = नमस्कार
  25. पुरः + कार = पुरस्कार
  26. निः + स्पृह = निस्पृह
  27. अंतः + करण = अंतःकरण
  28. प्रातः + काल = प्रातःकाल
  29. अधः + पतन = अधःपतन
  30. वाक् + ईश = वागीश (व्यंजन संधि)
  31. सम् + मान = सम्मान (व्यंजन संधि)
  32. दिक् + गज = दिग्गज (व्यंजन संधि)
  33. उत् + लास = उल्लास (व्यंजन संधि)
  34. जगत् + नाथ = जगन्नाथ (व्यंजन संधि)
  35. षट् + आनन = षडानन (व्यंजन संधि)
  36. तत् + लीन = तल्लीन (व्यंजन संधि)